यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रेनस्टेम की केवल कुछ सौ तंत्रिका कोशिकाओं के खोने से औसत रक्तचाप सामान्य रहने पर भी उसकी स्थिरता बिगड़ गई, यह अध्ययन Circulation Research में प्रकाशित हुआ है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने बताया है कि उन्होंने ब्रेनस्टेम में तंत्रिका कोशिकाओं की एक छोटी आबादी की पहचान की है, जो रक्तचाप को पल-पल स्थिर रखने में मदद करती है। Circulation Research पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन एक ऐसे तंत्र की ओर इशारा करता है जिसे सामान्य जांचें नज़रअंदाज़ कर सकती हैं: रक्तचाप का मूल्यांकन आमतौर पर उसके औसत से होता है, जबकि बढ़ते प्रमाण बताते हैं कि दिनभर में बड़े या तेज़ उतार-चढ़ाव औसत सामान्य दिखने पर भी हृदय रोग, स्ट्रोक और मस्तिष्क की चोट का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

विश्वविद्यालय के विवरण के अनुसार, ये कोशिकाएं तब रक्तचाप के उतार-चढ़ाव को सीमित करती प्रतीत होती हैं जब व्यक्ति सोने, जागने, खड़े होने और व्यायाम के बीच बदलाव करता है। मुख्य शोधकर्ता स्टीफन एबॉट ने कहा कि इन न्यूरॉन में से केवल कुछ सौ के खोने से रक्तचाप अस्थिर हो गया, जबकि औसत दबाव सामान्य रहा; उनके अनुसार यह दिखाता है कि दबाव को स्थिर रखने वाली प्रणाली काम करना बंद कर चुकी थी। यही कोशिकाएं पहले मल्टीपल सिस्टम एट्रॉफी वाले लोगों में क्षतिग्रस्त या अनुपस्थित पाई गई थीं, जो पार्किंसन से संबंधित एक दुर्लभ और घातक तंत्रिका रोग है और जिसमें अक्सर रक्तचाप नियंत्रण की गंभीर समस्याएं होती हैं।

ये निष्कर्ष शुरुआती शोध परिणाम हैं, कोई नया उपचार या चिकित्सकीय सलाह में बदलाव नहीं; उपलब्ध सारांश में मरीजों पर किसी परीक्षण का वर्णन नहीं है। लेखकों का सुझाव है कि यह तंत्र भविष्य में अन्य स्थितियों में अस्थिर रक्तचाप को समझाने और केवल औसत आंकड़े घटाने के बजाय हानिकारक उतार-चढ़ाव कम करने वाली चिकित्साओं का मार्गदर्शन करने में मदद कर सकता है। अध्ययन को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ ने वित्तपोषित किया और शोधकर्ताओं ने कोई वित्तीय हित न होने की जानकारी दी। अपने रक्तचाप को लेकर चिंतित लोगों को एक प्रयोगशाला अध्ययन से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।